Thursday, 27 April 2017

पंचतंत्र की कहानी - वृक्ष देवता

पुराने समय की बात है | एक गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम राजू  और दूसरे का नाम रमन था। राजू बहुत ईमानदार, मेहनती और अच्छे स्वाभाव का व्यक्ति था | परइसके विपरीत रमन बहुत दुष्टऔर धोखेबाज प्रवति का व्यक्ति था| एक दिन रमन के दुष्टदिमाग ने सोचा की राजू बहुत ईमानदार और मेहनती है | और इसका नई – नई योजना बनाने मे कोई  जबाब नहीं क्यों न राजू की दोस्ती का फायदा उठाया जाए। उसकी मेहनत और बुद्धिमानी से कमाए धन कमाया जाए और बाद मै उसका धन बड़ी चालाकी से हड़प लियाजाए|

यह सोचकर वह रमन, राजू  के पास जाता है | ओर बोलता है, मेरे दोस्त मैंने सोचा है कि हम दोनों को शहर जाकर धन कमाना चाहिए ताकि हमारा जीवन आराम से व्यतीत कर सके |  राजू को ये बात अच्छी लगी और रमन के साथ जाने के लिए वहतैयार हो गया | अगले ही दिन दोनों शहर की ओर चल देते है। और शहर मे दोनों को एक सेठ के पास नौकरी मिल जाती है | दोनों काफी लम्बे समय तक सेठ के पास नौकरी करते रहें | जिससे दोनों के पास बहुत सा धन अर्जित हो चूका था | काफी धन कमाने के बाद उन दोनों ने घर वापस जाने की योजना बनाई। और अगली सुबह दोनों मित्र अपना – अपना धन लेके गाँव की चल देते है | उनके गाँव के रास्ते में एक घना जंगल आता था | अभी दोनों आधे रास्ते पहुंचे ही थे कि रमन ने राजू से कहा, कि दोस्त इतना सारा धन हमें साथ ले जाना खतरे से खाली नहीं होगा। इसलिए हम इस धन को पास के जंगल में गाड़ देते है | और थोड़ा - थोड़ा धन अपनी आवश्यकता अनुसार रख लेते है | और जब हमें धन की आवश्यकताहोगी तो हम वापस यंहा आकरधन लेलेंगे। दोनों ने आपसी सहमती से धन को एक बरगद पेड़ के निचे गाड़ देते है | और गाँव चले जाते है।

और उसी रात रमन जंगल में जाकर अपना और राजू का धन निकाल लाता है | और अपने घर मे ला कर छुपा देता है । कुछ दिनों के पश्चात् रमन राजू के पास जाता है | और मासूम बनकर राजू से बोलता है, राजू मेरे मित्र मुझे कुछ धन की आवशक्ता है मुझे कुछ जरुरी काम आन पढ़ा है | तुम मेरे साथ जंगल चलो वंहा जाकर थोड़ा धन ले आते है। दोनों मित्र जंगल मे उस बरगद के पेड़ के पास पहुंचते है | वहाँ पहुँचकर खोदना शुरू किया और रमन ने  देखा की धन वहाँ नहीं है। यह देख कर रमन आशचर्य से उछल पड़ता है और चिल्लाता है | और बोलता है, राजू तुम्ही चोर हो तुमने ही मेरा सारा धन चुराया है, तुम्हारे और मेरे अलावा किसी और को इस बात का पता नहीं था|  इसका मतलब यह है की सारा धन तुमने ही चुराया है। राजू ने कहा ये तुम क्या बोल रहे हो मित्र मैंने धन नहीं चुराया है, मेरा विश्वाश करो । फिर राजू ने कहा | तुम अगर मेरे धन वापस नहीं करोगे तो मे पंचायत मै जाऊंगा | राजू ने अपने आप को सही साबित करने की पूरी कोशिश की पर रमन ने एक न मानि और दोनों पंचायत के पास पहुंचे है ।


रमन, राजू पे चोरी का आरोप लगाते हुए| मुखिया जी राजू ने मेरे पैसे चुराए है, और अब ये मुकर रहा है | अब आप ही न्याय करे | राजू नहीं मुखिया जी मैंने कोई चोरी नहीं की है |  इस पे मुखिया ने कहा | तुम दोनों के पास अपनी बाते सही साबित करने का कोई प्रमाण नहीं है| यह सुन कर रमन तुरंत बोलता है, नहीं मुखिया जी मेरे पास प्रमाण है | और इस पर पंचायत के सभी लोग हैरानी से एक दुसरे को देखते है| और मुखिया ने पूछा ऐसा कौन सा प्रमाण है तुम्हारे पास? रमन -  मुखिया जी जिस बरगद के नीचे हम दोनों ने धन गाडा था| उस बरगद मे सदियों से वृक्ष देवता रहते है | उन्होंने इसे चोरी करते हुए जरुर देखा होगा? मेरा पूरा विश्वास है उन पर| अगर उनसे चोरी के बारे मे पूछा जाये तो वह जरुर बताएँगे|


यह बात सुन कर मुखिया समझ जाते है, कि रमन की यह कोई न कोई चाल है | और मुखिया गाँव के सभी लोगो के साथ वंहा पहुँचते है, जंहा राजू और रमन ने धन को गाडा था | वंहा पर पहुंच कर वृक्ष देवता से बोलते है |

वृक्ष देवता जी कृपया करके ये बताए कि धन किसने चुराया है?  अब सारा फैसला आप के ही हाथ मै है |  मुखिया के बोलते ही तुरंत ही आवाज़  आती है |

सारा धन राजू ने ही चुराया है। ये सारी करतूत उसी की है | पेड़ से आवाज़ सुन कर सभी लोग आश्चर्य हो जाते है।  तभी मुखिया राजू को कुछ सुखी लकड़िया इक्कठी करने को बोलता है | और पेड़ के चारो तरफ रखने को बोलता है | और उसमे आग लगा देने को बोलता है |


जैसे ही आग जलने लगती है | गाँव के सभी लोग देखते है कि पेड़ की खोकर मे से कोई बुढा खांसताहुआ बाहरआता है | परवह बूढ़ा व्यक्ति कोई और नहीं रमन का पिता होता है | जिसे रमन ने पेड़ की छाल मे छिपा दिया था |

तभी मुखिया हँसते हुए बोलता है | मै तो तुम्हारी चालाकी पहले ही समझ गया था | मैंने ये सब नाटक इसलिए किया कि गाँव बालो को तुम्हारी असलियत पता चल सके | रमन शर्मिंदा हो जाता है | और सब से क्षमामांगते हुएबोलता है | मुझे माफ़ कर दो मै लालच मे आ गया था | और बाकि सभी गाँववालो से और राजू से माफ़ी मांगता है |

सारांश : !! हमें किसी का भी बुरा नहीं करना चाहिए !!

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समाप्त !



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Wednesday, 19 April 2017

पंचतंत्र की कहानी - दोस्ती

https://youtu.be/V3tRkDB5tPc 

एक घने जंगल मे बहुत पुराना कुआं था उस कुँए मे बहुत सारे मेंढक रहते थे, उन्ही मे से एक मेंढक था  जिसका नाम था स्वामी | कुँए के सभी मेंढक अकारण स्वामी का मजाक उड़ाते थे जिससे स्वामी बहुत परेशान रहता था |

एक बार की बात है एक मेंढक बोलता है अरे स्वामी कंहा जा रहे हो और क्या बात है? बड़े गुस्से मे दिख रहे हो| फिर दूसरी तरफ से दूसरा मेंढक मजाक उड़ाते हुए बोला! – लगता है, खाना नही खाया| जो मुझे खाने की नज़र से देख रहे हो|  


स्वामी – देख लूँगा तुम सब को यह बोलते हुए, वह वंहा से चला जाता है |


और सोचने लगता है कि इन सभी को सबक सिखाना ही पड़ेगा और फिर स्वामी कुँए से बाहर निकल आया और कुँए की मुंडेर पर बेठकर किसी ताकतवर प्राणी की राह देखने लगता है |


तभी स्वामी को एक साँप अपनी ओर आता हुआ दिखाई दिया उसे देखते ही उसकी बाछे खिल गयी| वो यह बात जनता था की ये साँप मेरे सभी शत्रुओं को ख़त्म कर सकता हैऔर फिर मुझे कोई नहीं चिढाएगा| यह सोच कर स्वामी साँप के पास जा पहुंचा| 

और बोला! मेरे नाम स्वामी है| क्या तुम मेरे से दोस्ती करोगे?


साँप फन फुफकारते हुए बोला! क्या कहा? तुम मेरे से दोस्ती करना चाहते हो?


स्वामी– तुमने बिलकुल ठीक सुना! मै तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूँ|


साँप – मैंने अपनी जिन्दगी मे पहली बार देखा ओर सुना है, की एक मेंढक साँप का दोस्त बनाना चाहता है|  क्या तुम्हे पता नहीं की सांपो को मेंढक का स्वाद बहुत पसंद है|


स्वामी (मुस्कुराते हुए)– मुझे पता है| लेकिन फिर भी मै तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूँ! इससे हम दोनों को ही फायदा होगा| 


साँप ने स्वामी से पूछा– इसमें भला मेरा क्या फायदा?


स्वामी ने साँप से बताया – मै जिस कुएं मे रहता हु| वंहा मेरे बहुत से सगे सम्बन्धी, रिश्तेदार और दोस्त भी रहते है,  मै उनकी तानो ओर बांतो से बडा परेशान रहता हूँ | उनकी वजह से मेरा जीना नरक बन गया है|


साँप– तो मै इसमें तुम्हारी क्या मदद कर सकता हों?


स्वामी– मै तुम्हे उस कुए मे ले चलूँगा| तुम मेरे बदमाश रिश्तेदारों को अपना भोजन बना लेना|


साँप– ये बहुत अच्छी योजना है, तुम बस मुझे उस कुए मे जाने का रास्ता बता दो|


स्वामी– ठीक है| 


और! फिर स्वामी उस भयानक साँप को उस कुएं के पास ले गया| और कुएं मे जाने का रास्ता बता दिया जिससे साँप बड़ी आसानी से कुएं मे घुस सकता था| फिर स्वामी साँप को लेकर कुएं मे पहंचा|


इधर स्वामी के विरोधियो का दिल दहल गया उनको अपनी मौत सामने दिखाई दे रही थी| स्वामी इशारा कर-कर के अपने विरोधियो के बारे मे बताने लगा| और अब साँप एक एक कर सभी मेंढको को  रोज़ खाने लगा|  अब साँप को मेंढको का स्वाद लग गया था| उसने अब स्वामी के रिश्तेदारों को भी खाना शुरू कर दिया था| 


स्वामी -  (साँप से) ये तुम क्या कर रहे हो? मैंने तुम्हे केवल अपने विरोधियो को खाने के लिए कहा था| लेकिन तुम मेरे रिश्तेदारों को क्यूँ खा रहे हो|


साँप – तुम मुझे यंहा ले कर आये हो तो तुम्हारा फ़र्ज़ बनता है कि मेरे लिए भोजन का प्रबंध करो नहीं तो मै तुम्हे भी खा जाऊंगा|  साँप की ये बात सुन कर स्वामी (मेंढक) समझ गया था की उसकी जान भी खतरे मे है| परन्तु स्वामी (मेंढक) बुधिमान था| उसने जल्दी ही अपनी जान बचने की योजना बना ली| ओर बोला ! ठीक है, मै तुम्हारे लिए भोजन का प्रबंध करूँगा| लेकिन उसके लिए मुझे कुँए से बाहर जाना पड़ेगा|  साँप बोलता है, अगर तुम भाग गए तो, ऐसा करता हो मै भी तुम्हारे साथ चलता हूँ|  


स्वामी - नहीं-नहीं अगर तुम मेरे साथ गए तो कोई भी मेंढक मेरे से दोस्ती नही करेगा| सब तुम्हे देख कर भाग जाएंगे| थोडा सा धीरज रखो!


साँप ने उसकी बात मान ली! और स्वामी कुँए से बाहर निकल कर भाग गया| वह सोच रहा था की मैं कितना बेबकुफ़ था की मैंने इस साँप पर भरोसा किया| अगर मैं इस कुँए से बहार नहीं निकलता तो ये साँप मुझे भी खा जाता|


सारांश:  हमें हमेशा कोई भी काम सोच समझ कर करना चाहिए|



समाप्त !

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Thursday, 13 April 2017

प्लेंटीमोन एपिसोड 1 हिंदी में

प्लेंटीमोन एक असाधारण बालक की कहानी है| जिसे जादुई दुनिया के सपने आते है इसी वजह से वो रोज सुबह देर से उठता है। एक सुबह प्लेंटीमोन को एक सपना आता है जिसमे उसे एक जादुई किताब दिखाई देती है| जिसे पढने में चिंतेश्वर प्रसाद (चिंटीया) उसकी मदद करेगा | और तभी उसकी माँ उसे उठा देती है| और फिर उसे नाश्ते में जैली देती है,पर वो उसे बिना खाए भाग जाता है| जब वो स्कूल पहुंचा तब उसके दोस्त भूतों के बारे में बाते कर रहे थे, तभी प्लेंटीमोन क्लास रूम में आता है, और फिर उसका एक दोस्त प्लेंटीमोन से पूछता है कि बताओ प्लेंटीमोन की भूत होता है या नहीं ? तब प्लेंटीमोन कहता है की अगर मानो तो होता है और ना मानो तो नहीं होता तभी टीचर क्लास में आती है | और सब अपने अपने  बैंच पर बैठ जाते है।

स्कूल की छुट्टी होने के पश्चात् प्लेंटीमोन और उसके मित्र जंगल मै भूतो की खोज करने चले जाते है| जहां प्लेंटीमोन रास्ता भटक जाता है, और वे एक दुसरे से अलग हो जाते है, इधर प्लेंटीमोन का मित्र योगी एक बड़े से पेड़ पर भुत को चुनौती भरा संदेश लिख देता है | (I challenge you) ओर जोर जोर से हँसने लगता है, और वापस घर लौट आते है|


इधर जंगल मे प्लेंटीमोन को जंगल मै एक अजीब सी आवाज़ सुनाई देती है, वो उधर ही चल देता है जंहा से आवाज़ आती है | वंहा देखता है कि चिंतेश्वर किसी पेड़ की शाखा मे उलझा हुआ है| फिर प्लेंटीमोन उसे मुक्त करवाता है, अचानक चिंतेश्वर (प्लेंटीमोन) को लात मरता है और वंहा से भाग जाता है|



प्लेंटीमोन उसके पीछे भागता है| भागते - भागते  अचानक प्रिंसेस (प्रिंसेस और लोला प्लेंटीमोन  के मित्र है, जो कि शैतानी शक्तियों लड़ने मे उसकी मदद करते है|) से टकरा जाता है| और फिर प्रिंसेस अपनी शक्ति से प्रहार करते हुए प्लेंटीमोन को चेतावनी देती है|  कि अगली बार दोबारा टकराया तो माफ़ नहीं करुँगी, उसी समय प्लेंटीमोन के दोस्तों की आवाज सुनाई देती है |


प्लेंटीमोन उसी तरफ भागने लगता है जंहा से आवाज आ रही थी| प्रिंसेस और लोला भी उसके पीछे-पीछे भागने लगते है| अचानक प्लेंटीमोन को घसीटने के निशान दिखाई देते है, ओर झाड़ियो के पीछे से चिंतेश्वर बाहर निकलता है| और प्लेंटीमोन चिंतेश्वर से पूछता है क्या तुम मेरी मदद करने आए हो? अचानक! चिंतेश्वर पर हमला होता है, वो टकलू शैतान का हमला होता है| (“टकलू शैतान” पेड़ से निकला हुआ भुत है, जिस पेड़ पर चुनौती भरा संदेश लिखा हुआ था|),  लोला बताती है, कि ये शैतान है| तभी टकलू शैतान का हमला होता है, चिंतेश्वर और प्लेंटीमोन दोनों को पकड़ लेता है। प्रिंसेस और लोला दोनों को बचाती है| इधर लड़ाई के दौरान चिंतेश्वर और प्लेंटीमोन अचानक! गायब हो जाते है|

फिर प्लेंटीमोन अपने आप को एक जादुई दुनिया मे खड़ा पता है| वंहा उसे सपने वाली जादुई किताब मिलती है, वह किताब उसे बताती है| की वह एक विशेष बालक है, दुनिया मै अच्छे काम के लिए चुनाब हुआ है| और इस काम मे चिंतेश्वर उसकी मदद करेगा| तभी प्लेंटीमोन बोलता है, कि क्या अच्छे कामो को करने के लिए मुझे भी सुपरपावर मिलेगी? तब चींटिया बोलता है, कि जरूर मिलेगी अगर नहीं मिली तो मै अपनी सुपर पॉवर तुम्हे देदूंगा। और फिर प्लेंटीमोन और चितेश्वर दोनों जादुई किताब पर हाथ रखते है, हाथ रखते ही प्लेंटीमोन के पास बहुत सी सुपर शक्ति आ जाती है|

इसके बाद दोनों (प्लेंटीमोन और चिंतेश्वर) वापस उसी स्थान पे आ जाते है, जंहा से वे गायब हुए थे|  इस बार टकलू शैतान से लड़ने मे प्लेंटीमोन मदद करता है| और इस उपरांत हमेशा की तरह बुराई पे अच्छाई की जीत होती है|

समाप्त !

Wednesday, 5 April 2017

पंचतंत्र की कहानी - ब्राहमण और तीन ठग

प्राचीन समय की बात है काशीपुर गाँव में देवेंदर नाम का एक ब्राहमण रहता था | वह पूजा पाठ करवा  कर अपना जीवन यापन करता था | एक बार ब्राहमण को किसी दुसरे गाँव मे एक सेठ ने पूजा करवाने  के लिए बुलाया, वंहा उसे पूजा करवाने के बदले मे उपहार स्वरुप एक मोटी ताज़ा बकरी मिली ब्राहमण बकरी को लेकर बहुत खुश हुआ और सेठ को आशीर्वाद देते हुए बकरी को कंधे पर ले कर गाँव की ओर चल दिया |

ब्राहमण के गाँव के रास्ते मे एक सुनसान और घना जंगल पड़ना था | उसी जंगल मे तीन ठग रहते थे, जो कोई राहगीर उस जंगल से गुजरता था वो उसको बेवकूफ बना कर उसे ठग लेते थे, अचानक उनकी नज़र देवेंदर ब्राहमण पर पड़ी और बकरी को देखा,  काफी मोटी ताज़ा बकरी को देखकर वे काफी खुश हुए और उन्होंने उसे हथियाने की योजना बनाई | उसमे से पहला ठग ब्राहमण की ओर चल देता है, और ब्राहमण को रोकते हुआ पूछता है, ब्राहमण देवता आप इस कुत्ते को कंधे पर बैठाकर कंहा ले जा रहे हो | एक ब्राहमण होकर आप को ये शोभा देता है क्या? देवेंदर ब्राहमण यह सुन कर क्रोधित हो गया और बोला या तो तुम अंधे हो या तो पागल हो, तुम्हे इतनी बड़ी बकरी कुत्ता दिखाई दे रही है, पहले अपने दिमाग का इलाज करवाओ जाओ यहाँ से,  बुरा मत मनो ब्राहमण देवता मे तो वही बोल रहा हूँ जो देखा है, चलो मुझे क्या आप की जो मर्ज़ी करो यह बोल कर वह ठग वंहा से चल जाता है |


अभी देवेन्द्र ब्राहमण थोड़ी दूर पर पहुँचता है के दूसरा ठग सामने आकर बोलता है, हे ब्राहमण  देव ये आप क्या कर रहे हो ब्राहमण बड़ी हैरानी से बोला क्यों क्या हुआ ? अरे आप इस मरे हुए बछड़े को कंधे पर लादे हुए कंहा जा रहे हो, इस पर ब्राहमण झुंझलाते हुए चिल्लाया और बोला, अंधे हो गए हो क्या तुम्हे इतनी बड़ी बकरी मरा हुआ बछड़ा दिखाई दे रहा है तुम मुर्ख तो नहीं हो ? ठग बोला, अरे ब्राहमण देव गुस्सा क्यों हो रहे हो मैंने जो देखा वो बोल दिया अब आप की मर्जी, यह बोल कर दूसरा ठग चला गया, देवेंदर ब्राहमण आगे बढ़ जाता है |

ब्राहमण ये सब सुन कर बडा परेशान हैरान हुआ कि लोग उसकी बकरी को कभी कुता कभी मारा हुआ बछड़ा क्यों बोल रहे है |

अभी कुछ दुरी पे ब्राह्मण पहुंचा ही था की तीसरा ठग आ धमका | उसने ब्राह्मण से कहा अरे | हे ब्राह्मण देव आप इस घोड़े के बच्चे को कंधे पे लादे कंहा ले जा रहे हो आप को समाज मे रहना नहीं है क्या लोग देखेंगे तो आप का मजाक उड़ायेंगे और आप का मान सम्मान कम हो जायेगा |

ब्राहमण क्या बात कर रहे हो तुम्हे ये बकरी घोड़े का बच्चा दिख रहा है |

इस बार ब्राहमण बोला तो था पर उसकी आवाज़ मे पहले जेसा न तो गुस्सा था और न ही ताकत |
इस पर ठग जोर जोर से हसने लगता है, और चला जाता है |

इधर ब्राहमण चिंता मे सोचने लगता है, लगता है ये बकरी कोई भूत प्रेत तो नहीं ये बार बार रूप बदल रहा हो, इसको तो फेक के निकल जाना चाहिए | ओर बकरी को फेक दिया और वंहा से भाग गया | और तीनो ठगो ने बकरी को उठाया और बहुत खुश हुए |

सारांश :   व्यक्ति को कभी भी किसी की बातों मै नहीं आना चाहिए |  

समाप्त !!

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Monday, 3 April 2017

Maha Cartoon TV

Maha Cartoon TV is the home of your favorite animated shows and interactive learning programs. Embodying the best of both domestic as well as International terrains, it proffers you with studios animation and top notch writing. Fulfilling the longing of those willing to see household characters, it's roster varies from the intellectual "Bal Chanakya" to the robust "Bali". 

It also comprises of the Indianised version of legendary cat and Mouse chase show aka Tom and Jerry in the form of "Mooshak-Gungun". For the thrill seekers, there is the fantastical 'Plantimon" and for those who adore fairy tales, there are the classic tales of Panchatantra. 

Of the live-action programs, the uproarious 'Charlie Chaplin' show will leave you in splits, while the high-brow 'Techno Kids' will stimulate your mind. Free for streaming both online and offline, it is the cardinal destination of umpteen entertainments.