Thursday, 25 May 2017

होशियार केकड़ा

प्राचीन समय कि बात है। एक घने जंगल में गहरी झील थी जिसमें कई जलचर जैसे मछलियाँ, मगरमच्छ, केकड़े साथ रहते थे। उसी झील के पास एक चालाक बगुला भी रहता था जो झील की मछली और केकड़े खा कर गुज़ारा करता था। परन्तु बढ़ती उम्र के चलते अब उसे शिकार करने में दिक्कते आने लगी थीं।

एक दिन उसके दिमाग में एक तरकीब आई जिससे वह झील की सारी मछलियाँ को पकड़ उन्हें खा सकता था। वह झील के किनारे बैठ झूठ मूठ के आंसू बहाने लगा। उसको रोता देख कई सारी मछलियाँ बगुले के पास आ गई। इतनी सारी मछलियों को अपने करीब देखकर उसका मन ललचाने लगा लेकिन जैसे तैसे उसने अपनी भावनाओं को काबू किया। 

बगुले की दशा देख एक मछली पूछती है - “क्या हुआ बगुला काका ? आप इतना परेशान क्यों हो ?"

अपनी असल भावनाओं को छिपाते हुए बगुला बोलता है - “क्या बताऊं ! आज मैं एक पंडित के पास गया जिसने मुझे बताया कि इस झील का पानी कुछ ही दिनों में सूखने वाला है जिससे यहाँ के सारे जानवर मर जायेंगे। जब से मैंने यह सुना है, तब से मुझे आप सभी कि चिंता सता रही है कि झील के पानी के सूखने के बाद आप सब का क्या होगा?”

 ये सुनते ही वह मछली घबरा जाती है और भाग कर अपनी रानी के पास जा कर उन्हें पूरा किस्सा सुनाती है। रानी उन्हें समझाती है कि हमें अपनी समस्या के समाधान के लिए बगुला काका के पास जाना चाहिए। 


सभी मछलियां एकत्रित होकर बगुले से मिलने जाती हैं और उससे समस्या का समाधान मांगती हैं। इतनी सारी मछलियों को अपने पास देखकर बगुले का मन ललचाने लगता है पर वह अपनी सोच पर काबू रखते हुए बोलता है - “आप सभी इस झील को छोड़ कहीं जल्दी दूर चलें जाएं। पहाड़ी के दूसरी तरफ एक और झील है। इस मुसीबत की घड़ी में मैं आपकी मदद करूँगा।"

सभी मछलियां बगुले की बात मान जाती हैं। उस दिन से बगुला एक-एक मछली को हर रोज़ झील से उठाकर दूर पहाड़ी ले जाने के नाम पर खाने लगता है। एक दिन उस बगुले के कब्जे में एक केकड़ा आता है  और बगुला मन ही मन सोचता है कि कितने दिनों के बाद आज वो किसी केकड़े को खायेगा।

केकड़ा जब पहाड़ी पर मछलियों के कंकाल देखता है तो वह समझ जाता है की बगुला उन्हें धोका दे रहा है। केकड़ा बगुले को अपने पंजो से दबा देता है जिससे वह उड़ नहीं पता और गिर कर मर जाता है। केकड़ा वापस झील जाकर पूरी कहानी बयां करता है और मछलियां बहुत दुखी होती हैं।

 सारांश : हमें कभी भी, किसी पर अँधा विश्वास नही करना चाहिए।

समाप्त!! 
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Wednesday, 24 May 2017

पंचतंत्र की हिंदी कहानियाँ | चतुर कबूतर

एक समय की बात है, किसी गाँव में एक बहेलिया रहता था | वह प्रतिदिन,अपने परिवार का जीवन निर्वाह करने के लिए शिकार करने जाता था। एक दिन जंगल में उसे कबूतरों का झुण्ड नजर आया और उन्हें देखकर वह सोचने लगा कि “काश मेरे पास ये सुन्दर कबूतर होते तो मैं इनके मनचाहे दाम वसूलता।” यह सोचकर बहेलिया जाल बिछाता है और कबूतरों को फ़साने के लिए दाने बिखेर झाड़ियों में छिप जाता है|

कुछ देर बाद एक कबूतर बिखरे हुए दानों को देखता है और बोलता है - “कितने सारे दाने हैं। लगता है आज हमें भोजन के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।" बाकी कबूतर भी दानों को देख उसकी हाँ में हाँ मिलाते
हैं


झुण्ड का सबसे बड़ा और अनुभवी कबूतर उन्हें रोकता है और कहता है - “रुको दोस्तों, मुझे तो ये किसी बहेलिए की चाल लगती है। वरना इतने घने जंगल में अचानक से इतने सारे दाने कहाँ से आ गए? यहाँ जरूर कोई है।"

उसकी बात को नजरअंदाज कर एक कबूतर बोलता है - "दादा, आप भी कमाल करते हो। अब तक तो हमें खाना नहीं मिल रहा था और अब जब मिल गया है तो आपको परेशानी हो रही है।  ये तो वही बात हुई कि हाथ को आया और मुंह ना लगा।” यह कहकर वह झुण्ड के बाकी कबूतरों के साथ दाना खाने उड़ जाता है। अनुभवी कबूतर नजदीक ही एक पेड़ की शाखा पर बैठ जाता है |

जैसे ही सभी कबूतर दाना चुगने लगते हैं, उन्हें ज्ञात होता हैं कि उनके पैर जाल में फंस चुके हैं। वे उड़ने के लिए पंख फड़फड़ाते हैं पर कुछ नहीं कर पाते। अनुभवी कबूतर अपने साथियों को दुविधा में देख उनके पास आता है।

दूसरी ओर बहेलिया कबूतरों को जाल में फंसा देख बहुत खुश होता है और उन्हें पकड़ने के लिए
झाड़ियों से बाहर निकलता है। अनुभवी कबूतर बहेलिये को देख फटाफट बोलता है - "तुम सब शांत रहो। इस तरह फड़फड़ाने से कुछ नहीं होगा और बहेलिया तुम्हे ले जायेगा। भलाई इसमें है की तुम सब साथ में जाल समेत ही उड़ जाओ।"

सभी कबूतर वैसा ही करते हैं और बहेलिये के पहुंचने से पहले जाल समेत उड़ जाते हैं। अनुभवी कबूतर अपने मूषक मित्र की मदद से जाल कुतरवा देता है और सभी कबूतर आज़ाद हो जाते हैं।

सारांश : एकता में बल है।

समाप्त ||
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Monday, 22 May 2017

झील का राक्षस

सुंदरवन के जंगल में एक विशाल झील थी | जंगल के सभी जानवर उस झील के पानी से अपनी प्यास बुझाते थे और रोजमर्रा के काम किया करते थे | एक समय की बात हैं उस झील पर एक विशाल राक्षस ने कब्ज़ा कर लिया और झील को अपना घर बना लिया | उस राक्षस ने जंगल के सभी जानवरों को वहां से डरा कर भगा दिया |

उस जंगल में बंदरो का एक विशाल समूह भी रहता था | बंदरो के समूह के सरदार ने एक दिन एक सभा का आयोजन किया और सभी बंदरो को उस सभा आने के लिए कहा, सभी बन्दर उस सभा में उपस्थित हुए |

बंदरो की सभा का दृश्य:-

बंदरो के सरदार ने सभा की शरुआत की,

बंदरो का सरदार- “आज मैंने तुम सभी को यहाँ यह कहने के लिए बुलाया हैं कि  कुछ समय से जंगल की झील पर एक राक्षस ने कब्ज़ा कर लिया हैं और उसने सभी को वहां से डरा कर भगा दिया और  झील पर कब्ज़ा कर सभी को पानी इस्तेमाल करने से वंचित कर दिया” 


तभी एक बन्दर सरदार की बात काटते हुए बोलता हैं|

बन्दर- “लेकिन सरदार अगर हम झील का पानी उपयोग नहीं करेंगे तो हम मर जायेंगे”|

सरदार- “जंगल में एक नदी भी हैं और तुम उस नदी का पानी क्यों नहीं उपयोग करते?”

सभी बन्दर एक साथ बोलते हैं-“ठीक हैं सरदार|”

कई साल बीत गए जंगल के सभी जानवरों ने उस झील की तरफ अपना रुख भी नहीं किया और नदी का ही पानी उपयोग करने लगे, लेकिन कुछ समय बीत जाने के बाद सुंदर वन में एक भयंकर आकाल पड़ा, सुंदर वन की नदी का पानी सूख गया और भोजन में भी कमी आने लगी| जंगल के सभी जानवर एक-एक करके जंगल को छोड़ कर जाने लगे|

लेकिन बंदरो के समूह को जंगल से कुछ खासा लगाव था| वो किसी भी परिस्थिति में जंगल को छोड़कर नहीं जाना चाहते थे| इस समस्या से निबटने के लिए बंदरो के सरदार ने एक बैठक बुलाई और उसमे सभी बंदरो को आमंत्रित किया|

तभी एक बन्दर बोलता हैं- “सरदार यदि हमने जल्दी ही इस पानी की समस्या का समाधान नहीं किया तो हम भूख और प्यास के मारे मर जायेंगे| भोजन के बिना तो जीवित रहा जा सकता हैं लेकिन पानी के बिना जीवित नहीं रहा जा सकता| सरदार क्या किसी तरीके से हमें झील का पानी मिल सकता हैं|”

सरदार बहुत देर तक कुछ सोचता हैं और फिर कहता हैं- “इस झील की समस्या से निबटने के लिए हमें उस राक्षस के पास चलना चाहिए और हम उससे झील के पानी का उपयोग करने का निवेदन करेंगे, क्या पता हमारा निवेदन सुनकर उस राक्षस को हम पर तरस आ जाए और वो हमें उस झील का पानी उपयोग करने दे|”

बंदरो का सरदार सभी बंदरो के साथ उस झील के पास जाता हैं और झील के राक्षस से कहता हैं- “इस झील के महाराज कृपया कर बहार निकले हम सब आपसे मिलने आए हैं|” तभी झील का राक्षस बहार निकलता हैं और उस राक्षस की आँखे लाल थी, और उन सभी बंदरो से वो गुस्से में बात करता हैं|

राक्षस- “कौन हो तुम लोग और यहाँ क्या लेने आये हो और तुम सब ने मुझे नींद से क्यों जगाया?”

बंदरो का सरदार कहता हैं-“ए झील के महाराज जंगल में आकाल पड़ने के कारण नदी का पानी सूख गया हैं, हमारे सभी साथी भूख और प्यास के मारे बेहाल हैं हम सभी आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि आप हमें इस झील का पानी उपयोग करने दे|”

राक्षस गुस्से में कहता हैं- “अगर नदी का पानी सूख गया हैं तो तुम सब जंगल छोड़ कर क्यों नहीं चले जाते, जैसे कि और सारे जानवर चले गए हैं?”

तभी बन्दर का सरदार कहता हैं- “ए महाराज हम इस जंगल में काफी समय से रहते आये हैं और हमारा मन इस जंगल में रम चुका हैं, हम सभी यहाँ ही रहना चाहते हैं| कृपया हमारा निवेदन स्वीकार करे|”

राक्षस गुस्से से कहता हैं- “अगर तुम सब जंगल छोड़ कर नहीं जाना चाहते तो तुम्हे झील का पानी नहीं मिलेगा और अगर तुममे में से किसी ने भी इस झील का पानी लेने की गुस्ताखी की तो में तुम्हे खा जाऊँगा| अब भागो यहाँ से|” सभी बन्दर डर कर भाग आते हैं लेकिन बंदरो के सरदार ने हार नहीं मानी और कुछ देर तक सोचने के बाद उसने सभी बंदरो को दो समूह में बाँट दिया कुछ को उसने एक बड़ा सा गड्ढा खोदने के लिए कहा और कुछ को उसने बांस को काटने का आदेश दिया|

कुछ ही समय में बंदरो के एक समूह ने उस झील के पास गहरा गड्डा खोद दिया और दूसरे समूह ने बांस को काटकर मजबूती से एक लम्बा सा पाइप बना दिया जिसका एक सिरा उन्होंने झील में डाला और दूसरा सिरा उन्होंने उस गड्डे में डाल दिया और झील का पानी धीरे-धीरे उस गड्डे में भरने लगा और बंदरो को झील का पानी मिल गया|

इस तरह से हमने ये जाना कि किस तरह से बंदरो के सरदार ने हार नहीं मानी और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके सुख शांति से झील का पानी उपयोग किया|

तो बच्चो हमें झील के राक्षस कि कहानी से यह शिक्षा मिलती हैं कि बल से ज्यादा बुद्धि बलवान होती हैं|

समाप्त !! 
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Friday, 19 May 2017

प्लेंटीमोन और स्कूबी राक्षस | हिंदी कार्टून

प्लेंटीमोन हमेशा कि तरह सुबह देर से उठता है | उधर प्रिंसेस को पता चलता है कि प्लेंटीमोन के स्कूल में अजीबो-गरीब घटनायें हो रही होती हैं, जिससे  प्रिंसेस को शक होता है कि स्कूल में ही कोई राक्षस छिपा हुआ है|

स्कूल पहुंचने पर प्लेंटीमोन को पता चलता है कि आज एक नया विद्यार्थी क्लास में आएगा | तभी अध्यापिका क्लास में आती हैं और नए विद्यार्थी का परिचय करवाती हैं | प्लेंटीमोन यह देखकर हैरान रह जाता  है कि यह विद्यार्थी कोई और नहीं खुद प्रिंसेस ही होती है | क्लास के बाद सभी बच्चे, प्रिंसेस से मिल रहे होते हैं कि तभी उनमें से एक लड़का (गोगी) प्रिंसेस का मजाक उडाता है | इससे प्रिंसेस नाराज़ हो जाती है और जादुई शक्ति से गोगी का मुहँ बंद कर देती है | तभी प्लेंटीमोन वहां आ जाता है और प्रिंसेस को वहाँ से ले जाता है | प्लेंटीमोन, प्रिंसेस को समझाता है कि उसे(प्रिंसेस) सबके सामने अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं  करना चाहिए | लेकिन प्रिंसेस उसकी(प्लेंटीमोन) बात नहीं मानती और दोबारा से शक्ति का इस्तेमाल करती है| 

इसके बाद स्कूल में लंचटाइम हो जाता है| प्रिंसेस, पहली बार स्कूल में लंच को लेकर बहुत उत्साहित होती है| लेकिन जैसे ही वो देखती है कि खाने में “शिमला मिर्च” है तो वो जोर से चिल्लाती है और बताती है कि उसे ‘शिमला मिर्च’ से नफरत है| वो प्लेंटीमोन  को शिमला मिर्च खाते देख कर हैरान हो जाती है और पूछती है कि वो इसे कैसे खा सकता है| प्लेंटीमोन उसे बताता है कि खाना तो भगवान है | इसका आदर करना चाहिए|

उधर दूसरी तरफ शैतान “किटी-पाई” ये जानकार बहुत खुश होती है कि प्रिंसेस कि कमजोरी राज़ शिमला मिर्च है| वह अपनी जादुई शक्ति से, कूड़े में पड़ी ‘शिमला मिर्च’ से “स्कूबी” नाम के शैतान का निर्माण करती है | और वो उसे (स्कूबी) याद दिलाती है कि कैसे सब लोगो ने शिमला मिर्च को कूड़े में फैंक दिया करते थे|इसके बाद, किटी-पाई, स्कूबी शैतान को इंसानों पर हमला करने का आदेश देती है| 


स्कूल कि छुट्टी के बाद प्लेंटीमोन और प्रिंसेस घर पहुँचते हैं | घर पहुँचने पर प्रिंसेस को पता चलता है कि प्लेंटीमोन कि माँ ने भी आज खाने में ‘शिमला मिर्च’ बनाई है | लेकिन प्रिंसेस “शिमला मीर्च” सुनते ही परेशान हो जाती है और खाना खाने से मना कर देती है|

अगले दिन प्लेंटीमोन और प्रिंसेस साथ-साथ स्कूल में जाते हैं | लंचटाइम होने पर प्रिंसेस देखती है कि आज भी लंच में ‘शिमला मिर्च’ बनी है | यह देखकर प्रिंसेस परेशान हो जाती है | तभी प्लेंटीमोन देखता है कि खाना खा रहे सभी बच्चे एक-एक करके बेहोश हो रहे हैं | उसी समय वहां पर लोला और चिंटीया (चिन्तेश्वर) भी  आ जाते है| चिंटीया सबको बताता है कि प्लेंटीमोन कि माँ भी  शिमला मिर्च खाने से बेहोश हो गई थी पर अब वो ठीक है, तभी लोला उन्हें बताती है कि उसे लगता है कि यहाँ पर कोई बुरा शैतान है जो ये सब कर रहा है| प्लेंटीमोन सभी को कहता है कि हमें जल्द से जल्द उस शैतान को ढूढना होगा |

इसके बाद वो सभी शैतान स्कूबी को ढूँढने निकल जाते है|जैसे ही वह ऑडिटोरियम में पहुँचते हैं, स्कूबी शैतान उन पर हमला कर देता है, लेकिन चिंटीया उन्हें बचा लेता है| प्रिंसेस, स्कूबी शैतान से पूछती है कि वह कौन है और ऐसा क्यूँ कर रहा है| इस पर स्कूबी शैतान उन्हें बताता है कि वो शिमला मिर्च का शैतान “स्कूबी” है और वो इंसानों से उसके साथ हुए बुरे व्यवहार का बदला लेने आया है|

तब प्रिंसेस और प्लेंटीमोन, लोला और चिंटीया से अपनी शक्तियां लेकर स्कूबी शैतान का मुकाबला करते है| शैतान स्कूबी उन पर मिर्च स्प्रे से हमला करता है| लेकिन प्लेंटीमोन अपनी शक्तियों से सारा स्प्रे ऑडिटोरियम के वेंटिलेशन सिस्टम से बाहर निकाल देता है | इसके बाद प्लेंटीमोन अपनी शक्तियां, चिंटीया को देता है और वो मिलकर शैतान स्कूबी को हरा देते हैं और अंत में हमेशा कि तरह बुराई पर अच्छाई कि जीत होती है | ‘किटी-पाई’ शैतान यह देख कर बहुत गुस्सा होती है और उन्हें धमकी देते हुए कहती है कि अगली बार वो लोग नहीं बचेंगे  और गायब हो जाती है|

अगले दिन सुबह प्रिंसेस और प्लेंटीमोन, घर पर खाने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहे होते है| तभी प्लेंटीमोन की माँ उनके लिये स्पेशल गरमागरम खाना लेकर आती है| जिसे देख कर प्रिंसेस बहुत खुश होती है और बड़े चाव से खाना खाने लगती है| इस पर प्लेंटीमोन कि माँ प्लेंटीमोन को बड़े धीरे से बताती है कि उसने इन खाने  के अंदर शिमला मिर्च डाली  है और ये सुन कर दोनों हसने लगते है|

समाप्त !!
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Tuesday, 2 May 2017

प्लेंटीमोन और घास का शैतान - हिंदी कार्टून भाग - २


प्लेंटीमोन हर रोज कि तरह सुबह-सुबह  जादुई दुनिया के सपने देख ही रहा होता है | कि तभी उसकी नींद खुल जाती है और वह देखता है | कि उसकी माँ उसके सामने खड़ी है जो उसे नाश्ता के लिए नीचे बुला रही होती है| हमेशा कि तरह प्लेंटीमोन बिना खाना खाए स्कूल भाग जाता है| जब वह स्कूल पहुँचता है तो अनजाने में कूड़ेदान से टकरा जाता है और तभी वह अपने जादुई सपने के बारे में सोचता है| प्लेंटीमोन  सोचता है के क्यों न इस कूड़ेदान को जादुई शक्ति से उठाया जाये और वह जादुई शक्ति का प्रयोग करने कि असफल कोशिस करता है | ये देख कर स्कूल के बच्चे प्लेंटीमोन को पागल कहने लगते हैं |

इधर प्रिंसेस और लोला जंगल में किटी-पाई का पीछा कर रहे होते हैं लेकिन किटीपाई पकड़ में नही आती और वह बचकर भाग जाती है | इससे प्रिंसेस को अहसास होता है कि वह किटी-पाई को अकेले नहीं पकड़ सकती और उसे प्लेंटीमोन कि जरूरत पड़ेगी| उधर स्कूल कि छुटी होने पर प्लेंटीमोन अपने घर जा रहा होता है तो प्रिंसेस, प्लेंटीमोन को जबरदस्ती अपने साथ जंगल में ले जाती है|

प्लेंटीमोन, प्रिंसेस को पूछता है कि वह उसको जंगले में क्यों ले के आई है|तब प्रिंसेस, प्लेंटीमोन को बताती है कि परलोक से एक बुरी आत्मा धरती पर आई है जो धरती का विनाश करना चाहती है |इसके लिए प्रिंसेस , प्लेंटीमोन को उसकी सहायता करने क लिए कहती है| लेकिन प्लेंटीमोन सहायता करने से मना कर देता है| तब प्रिंसेस उसे समझती है वह भी उस मिशन का हिस्सा है और अकेले वह जादुई शक्ति का प्रयोग नही कर सकता | प्रिंसेस, प्लेंटीमोन को बताती है कि वह  चिंतेश्वर प्रसाद (चिंटीया) कि मदद से ही जादुई शक्ति का प्रयोग कर सकता है| तब प्लेंटीमोन, प्रिंसेस को बताता है कि चिन्तेश्वर उसको पसंद नहीं करता और वह भाग गया है,तब प्रिंसेस चिन्तेश्वर को भी ढूंड कर ले आती है|

दूसरी और किटीपाई घास के शैतान को आदेश देती है कि वह इंसानों को सबक सिखाये| तब घास के शैतान ने अपनी जादुई शक्ति से पुरे शहर को घास से ढक देता है | इधर प्रिंसेस, प्लेंटीमोन, लोला  और चिन्तेश्वर जंगल से शहर कि तरफ आ रहे होते हैं | तो उन्हें पता चलता है कि किसी शैतान ने शहर पर हमला कर दिया है | प्लेंटीमोन और उसके दोस्त सोच ही रहे होते हैं  कि ये हमला किसने किया? कि तभी घास का शैतान उन पर हमला कर देता है | तब लोला, प्रिंसेस कि शक्ति से शैतान पर हमला कर  देती है | लेकिन वह उस घास के शैतान का सामना नहीं कर पाते | तब प्लेंटीमोन अपनी शक्ति का प्रयोग करता है और घास के शैतान को हरा देता है|इसके बाद जब प्लेंटीमोन और उसके दोस्त बात कर रहे होते हैं , तभी किटीपाई वहां आ जाती है और कहती है | कि वह बदला लेने दोबारा आएगी, और इतना कह कर वह गायब हो जाती है |

प्रिंसेस, प्लेंटीमोन से कहती है कि किटीपाई को पकड़ने कि लिए कुछ दिन इस शहर में रहना पड़ेगा | इसके बाद प्लेंटीमोन और उसके दोस्त अपने अपने घर चले जाते हैं | जब प्लेंटीमोन घर पहुँचता है तो, देखता है कि प्रिंसेस पहले से ही उसके घर पर उसकी माँ के साथ मौजूद थी |

तब प्लेंटीमोन, प्रिंसेस को कहता है कि उसे, उसके घर में, उसके कहे  अनुसार ही रहना होगा |

समाप्त !

Monday, 1 May 2017

प्लेंटीमोन - मैराथन की चुनौती


प्लेंटीमोन और प्रिंसेस दोनों स्कूल में कुछ गुप्त जांच पड़ताल के लिए जाते है |जहाँ प्लेंटीमोन ने  बैग में चिंतेश्वर को और प्रिंसेस ने  बैग में लोला को छुपाया होता है। इतने में  चिंतेश्वर बैग से बाहर आने का प्रयास  करता है | प्लेंटीमोन उसे रोकता है | पर चिंटीया  गुस्से में  प्लेंटीमोन के  हाथ पर काट लेता है।  इतने में क्लास शुरू  हो जाती जाती है|  और प्लेंटीमोन ग़ुस्से में  चिंटीया को बैग में  डालता है और क्लास में चला जाता है।
तभी क्लास में एक मैराथन रेस की  घोषणा होती है। प्लेंटीमोन भी मैराथन रेस में हिस्सा लेने के लिए कुछ तय नहीं कर पता है कि  उसे रेस में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं ?

उसके बाद वो लोग घर चले जाते है | लेकिन घर जाकर भी प्लेंटीमोन मैराथन का पेज लेकर गहरी सोच में पड़ा होता है| ये देखकर प्रिंसेस उससे पूछती है की क्या तुम भी मैराथन रेस में हिस्सा लोगे प्लेंटीमोन ? प्लेंटीमोन बिना सोचे मना कर देता है, और मैराथन के पेज को मरोडकर फेक देता है।  तब प्रिंसेस उसे रेस में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित करती है।

अगली सुबह प्लेंटीमोन भी अपना नाम रेस में लिखवा लेता है और स्कूल के मैदान पर रेस का अभ्यास करने लगता है।  तभी  प्रिंसेस अपनी शक्ति से प्लेंटीमोन की रफ़्तार बढ़ा देती है जिससे प्लेंटीमोन तेज रफ़्तार में जाकर दीवार से टकरा जाता है | उसका सहपाठी गोगी 'जिसने पहले  से रेस में हिस्सा लिया होता है | वो प्लेंटीमोन  की रफ़्तार देखकर  चिढ़ जाता है और  प्लेंटीमोन को छ्ल से हराने की योजना बनाता है | उसकी योजना चिंटीया सुन लेता है और नजरंदाज़ कर देता है | उधर प्लेंटीमोन प्रिंसेस पर ये बोलकर गुस्सा करता है कि ‘अगर उसे शक्ति से ही रेस जीतनी होती तो वो कभी रेस में हिस्सा ही न लेता मुझे ये रेस  अपनी क़ाबलियत से जीतनी है |

वही  एक जगह  आचानक से आसमान में काले बादल किटीपाई की तरफ उमड़ जाते है और एक अनजान आवाज सुनाई देती है | वो किटीपाई के उस्ताद की आवाज  होती है जो किटीपाई को इंसानों का विनाश करने का आदेश देती है | किटीपाई अपने उस्ताद के गुस्से से डर जाती है और उसके आदेश का पालन करने निकल पडती है |

शाम के वक्त जब प्लेंटीमोन और प्रिंसेस घर पर रेस की रणनीति बना रहे होते है तभी  प्लेंटीमोन को उसकी माँ का फ़ोन आता है जिसमे वो बोलती है की वो मैराथन रेस देखने नही आ पाएगी क्योकि उसे ओवरटाइम ड्यूटी करनी पड़ेगी| तब प्लेंटीमोन  उदास होकर कमरे में चला जाता है |

अगली सुबह रेस शुरु होती है जिसमे सभी प्रतिभागी भागते है  प्लेंटीमोन को हराने के लिए गोगी का दोस्त प्लेंटीमोन  के रास्ते में कंचे दाल देता है| जिससे प्लेंटीमोन गिर जाता है| प्लेंटीमोन हार नही मानता और वो खड़ा होकर फिर से दौड़ने लगता है| उसके बाद प्लेंटीमोन को रस्ते से भटकाने के लिए गोगी का दोस्त रेस की दिशा दर्शाने वाला निशान पलट देता है जिससे प्लेंटीमोन दिशा भटक जाता है और कही और पहुँच जाता है | प्लेंटीमोन को अकेला देख किटीपाई  को लगता की यही सही समय है प्लेंटीमोन पर हमला करने का इसलिए वो खुशबू को प्लेंटीमोन पर हमला करने के लिए बोलती है खुसबू अपनी सुपर पॉवर से प्लेंटीमोन पर हमला करने निकल पडती है |

इधर आचानक  चिंटीया को गोगी की योजना के बारे में ख्याल आता है | तब वो प्रिंसेस को गोगी की योजना के बारे में बताता है | प्लेंटीमोन को मुसीबत में सोचकर  प्रिंसेस लोला और चिंटिआ अलग अलग  ‘प्लेंटीमोन को धुंडने निकल पड़ते है | यहा प्लेंटीमोन पर हमला होने ही वाला था कि चिंटिआ उसे बचाने के लिए वह पहुच जाता है पर खुसबू फिर भी उनपर भारी पड़ रही होती है| थोड़ी ही  देर में प्रिंसेस और लोला भी वहा पहुँच जाते है और उनके बीच  एक घमासान लड़ाई होती है जिसमे दोनों पक्ष के लोग एक दुसरे पर वार करते है |अंत में प्रिंसेस और प्लेंटीमोन अपनी सुपरपावर से खुशबू का शक्ति के निशान को तोड़ देते और उसे हरा देते  है जिससे खुशबू की सारी सुपरपावर प्रिंसेस कि शक्ति बेटन में आ जाती है |

उसके बाद प्लेंटीमोन रेस को पूरा करने के लिए दौड़ने लगता है तब देखता है की उसकी माँ भी उसके समर्थन के लिए आई है | अपनी माँ को अपने समर्थन में देख प्लेंटीमोन बहुत खुश होता है | वो रेस जरुर हार जाता है पर फिर भी वो रेस को पूरा करता है क्योकि उसके लिए रेस जीतना नही बल्कि रेस को पूरा करना जरूरी था | 
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समाप्त !